Er. Mak Meer'S Blog

www.makmeer.com

Er. Mak Meer'S Blog

www.makmeer.com

Er. Mak Meer'S Blog

www.makmeer.com

Er. Mak Meer'S Blog

www.makmeer.com

Er. Mak Meer'S Blog

www.makmeer.com

Saturday, November 26, 2011

अपने कंप्यूटर को वाईरस से कैसे बचाएं?

कंप्यूटर में आए दिन छोटी मोटी समस्या होती ही रहती हैं| इन सभी समस्यायों में सबसे मुख्य है कंप्यूटर वाईरस| हर किसी के कंप्यूटर में वाईरस है| हर कोई वाईरस से परेशान है| हर आएदिन कंप्यूटर में कुछ ना कुछ होता ही रहता है, और समझ में आता नहीं सो अलग है| क्यों ऐसा ही है ना?? अगर ऐसा ही है तो आपका कंप्यूटर वाईरस की गिरफ्त में है| वाईरस से बचने का सिर्फ एक मात्र तरीका यही है की इसे ठीक से भली-भांति समझ लिया जाए|

वाईरस होता क्या है?
वाईरस एक प्रकार का लोजिकल प्रोग्राम है जो की सॉफ्टवेर इंजिनियर के द्वारा किसी ख़ास काम के लिए बनाया जाता है| जैसे जीव वाईरस मानव शरीर में प्रॉब्लम करता है, ठीक वैसे ही कंप्यूटर का वाईरस कंप्यूटर में नुकसान करता है| अगर मैं यहाँ वाईरस की प्रोग्रम्मिंग बताने बैठ गया तो यह लेख बहुत ही बड़ा और पका देने बाला हो जायेगा| अत: जो लोग प्रोग्रामिंग के विषय में जानना चाहते हैं वह अलग से मुझ से पूछ सकते हैं| बस अभी यहाँ इतना समझ लीजिये की वाईरस एक ऐसा प्रोग्राम है जो सिर्फ आपके कंप्यूटर को ख़राब करने के लिए ही बनाया गया है|

वाईरस नुकसान कैसे पहुंचता है?
जैसे की मैंने आपको पहले ही बताया की वाईरस लोगिकल प्रोग्राम होता है अत: यह आपके विरुद्ध आपके पीसी में बदलाव करने लगता है| वाईरस के द्वारा किये गए वदलाव हमारे लिए नुकसान भरे होते हैं| जैसे की फाईल्स का बिना पूछे डिलीट मार देना, न्यू-न्यू फाईल्स खुद बना देना, सॉफ्टवेर को कर्रप्ट कर के ख़राब कर देना, विंडो की रजिस्ट्री, हिस्टरी, कैश आदि खा जाना| ड्राईव में पड़े डाटा को नुकसान पहुचना आदि|

वाईरस से कैसे बचे?

वाईरस से सिर्फ और सिर्फ ज्ञान से ही बचा जा सकता है| यदि आपको ज्ञान हो गया तो आप कभी भी वाईरस के चक्कर में फस के उल्लू नहीं बन सकते| ही ही ही...
1 ) वाईरस से बचने के लिए अपने कंप्यूटर में बढ़िया सा एंटी वाईरस लोड किया जाना चाहिए| अब अब सोच रहे होंगे की बढ़िया वाला एंटी वाईरस प्रोग्राम कोनसा है? देखो भाई मार्केट में तमाम बढ़िया-बढ़िया एंटी वाईरस है कोई सा भी लोड कर लो यार| कुछ लोग 1000 -1500 वाला एंटी वाईरस प्रोग्राम लोड करता है तो कोई फ्री का ही काम चलाता है| वैसे Avast एंटी वाईरस फ्री और नॉन-फ्री दोनों की मस्त हैं|
2 ) एंटी वाईरस चाहे पैसे से खरीदा जाए या फ्री का लोड किया जाए, यदि पहले से ही कंप्यूटर में वाईरस है तो फिर कुछ भी फायदा नहीं है, अत: फ्रेश विंडो में सबसे पहले ही एंटी वाईरस लोड कर देना सबसे अच्छा विकल्प है| एक बार कंप्यूटर में वाईरस लग जाता है तो उसकी हालत एड्स के मरीज़ जैसी हो जाती है जिस पर सब एंटी डोस बेअसर साबित होते हैं|

3 ) सबसे ज्यादा वाईरस पेन ड्राईव की वजह से फैलता है| आजकल पेन ड्राईव का चलन भी खूब होने लगा है और बेबकूफ से बेबकूफ भी पेन ड्राईव का प्रयोग कर रहा है| यू एस बी ड्राईव, पेन ड्राईव या मेमोरी कार्ड आदि का प्रयोग बहुत सावधानी पूर्वक करना चाहिए|

4 ) यू एस बी ड्राईव, पेन ड्राईव या मेमोरी कार्ड आदि को माय कंप्यूटर में राईट क्लिक करने पर open, Explore, Search, Autoplay आदि आप्शन दिखाई देते हैं, भूल कर भी इन आप्शन को क्लिक ना करे, आपके में वाईरस फ़ैल जाने के चांसेस 95 % है क्यूकी ज्यादातर वाईरस बनाने वाले इन्ही आप्शन का प्रयोग करते हैं| इस तरह की प्रोग्रामिंग को शैल प्रोग्रामिंग कहा जाता है|

5 ) यू एस बी ड्राईव, पेन ड्राईव या मेमोरी कार्ड आदि का प्रयोग कर रहे हैं तो माय कंप्यूटर के एड्रेस बार से ही ड्राईव को एक्सेस करने की कोशिश करें| ये सबसे सुरक्षित व भरोसेमंद तरीका होता है|

6 ) अपने एंटी वाईरस प्रोग्राम को हमेशा अप टू डेट रखना चाहिए| इसके लिए एंटी वाईरस प्रोग्राम बनाने वाले संगठन टाइम टू टाइम अपडेट अपनी वेबसाइट पर रिलीज़ करते रहते हैं| यदि कंप्यूटर में लाइव इन्टरनेट कनेक्शन है तो एंटी वाईरस खुद अपने आप को अपडेट कर लेगा और आपको कुछ भी नहीं करने की ज़रूरत|
7 ) जिन कंप्यूटर में लाइव इन्टरनेट कनेक्शन नहीं है वो लोग साइबर कैफे या अन्य इन्टरनेट सौर्स के माध्यम से एंटी वाईरस की अपडेट डाउनलोड कर अपने कंप्यूटर में लोड कर सकते हैं| 7 से हर 15 दिन के बीच अपना एंटी वाईरस अपडेट करते रहना ज़रूरी है|

8 ) बहुत से लोग एंटी वाईरस के एक्टिवेशन और अपडेट में कन्फ्यूज़ हो जाते हैं|
एक्टिवेशन का अर्थ एंटी वाईरस की काम करने की अवधी जो की 30 दिन, 6 माह या एक साल जो भी हो सकती है| इस अवधी के बाद एंटी वाईरस एक्सपायर हो जाता है और काम करना बंद कर देता है| रीन्यू करने के लिए फिर से पेमेंट देना होता है| फ्री वालो को भी एक्टिवेट करना पड़ता है|
अपडेट का अर्थ एंटीवाईरस का वाईरस डाटाबेस अपडेट रखना है| जब तक आपके एंटी वाईरस को पता ही नहीं होगा की कोनसा प्रोग्राम है और कोनसा वाईरस प्रोग्राम तब तक वो उल्लू की तरह ही आपके कंप्यूटर में पड़ा रहेगा ना| अपडेट से इसका वाईरस पकड़ने का दायरा बढता ही है|

9 ) पाईरेटेड सॉफ्टवेर कंप्यूटर में सबसे जयादा नुकसान बेसिक यूसर को पहुंचाते हैं, एडवांस यूसर के लिए तो ये फ्री का माल होते हैं| पाईरेटेड प्रोग्राम अक्सर वाईरस से युक्त होते हैं| जहाँ तक हो सके पाईरेटेड विंडो और पाईरेटेड सॉफ्टवेर प्रोग्राम आदि इंस्टाल ना करें|

10 ) हफ्ते महीने भर में अपने कंप्यूटर को फुल सिस्टम इस्कैन करते रहे ताकि कोई वाईरस नज़र से बचने ना पाए| फुल सिस्टम स्कैन का टाइम ऐसा चुने जिसमे आपको कंप्यूटर प्रयोग में नहीं लेना है, जैसे की रात का टाइम या फिर आपका फ्री

जहाँ तक हो अपना ज्ञान बढायें और कंप्यूटर वाईरस से होने वाले नुकसान से खुद को बचाएं| वाईरस फ्री रहें, टेंशन फ्री रहें!!

धन्यवाद!!
आपका अपना
इंजिनियर मैक मीर
(निदेशक)
आई टी मैक डोट कोम
प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान
आगरा|


Monday, October 24, 2011

कंप्यूटर को फास्ट करने हेतु 10 उपाय


अक्सर ये होता है, की नया कंप्यूटर शुरूआत में तो बहुत तेज़ गति से काम करता है, मगर जैसे जैसे वक़्त बीतता जाता है स्लो पड़ता जाता है| कुछ लोग तो रीफॉर्मेट कर के बार-बार विंडो ही बदला करते हैं| मैंने कुछ स्टुडेंट्स से पूछा की फॉर्मेट क्यों करते हो तो सबका जबाब वही एक जैसा था, "सर ये स्लो बहुत हो गया था तो फॉर्मेट कर डाला|"

जयादातर लोगो का मानना है की फॉर्मेट करने से कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर एर्रोर्स आ जाते हैं| फॉर्मेट करना कोई गलत बात नहीं है| आप जितनी चाहो बार फॉर्मेट कर सकते हैं| इस से आपकी हार्ड डिस्क या रेम पर कोई भी बुरा असर नहीं पड़ता| मगर अब सवाल ये उठता है की "क्या कंप्यूटर बार-बार फॉर्मेट ही किया जाये?" नहीं !! हरगिज़ नहीं| ज़रूरत क्या है? फॉर्मेट करने की भाई|



फॉर्मेट करना भी एक कला है| अक्सर नौसिखिये लोग गलतीयाँ करके अपना वक़्त और कीमती डाटा बर्बाद कर डालते हैं| यहाँ मैं आपको कुछ टिप्स बता रहा हूँ| शायद अगली बार से आपको सिस्टम फॉर्मेट ही ना करना पड़े|

(1) कम से कम और सिर्फ काम के सॉफ्टवेर ही कंप्यूटर में लोड करने चाहिए| आलतू-फालतू सॉफ्टवेर से कंप्यूटर की डिस्क और मेमोरी खाम-खा भर जाती है|

(2) सॉफ्टवेर लोड करते वक़्त बहुत सावधानी पूर्वक नेक्स्ट - नेक्स्ट करते जाए| अक्सर ऐसा होता है की किसी अच्छे सॉफ्टवेर के साथ बेकार के टूल भी लोड हो जाते हैं, जिनकी आपको कतई ज़रूरत नहीं होती| उदाहरण के लिए आप अपना इन्टरनेट एक्स्प्लोरर या मोज़िला फायरफोक्स देख लीजिये| अगर टूलबार की बाड़ आई है, तो यह लेख यक़ीनन आपके लिए ही है|

(3) टाइम टू टाइम बेकार के सॉफ्टवेर को अनिस्टाल करना बहुत अच्छा रहता है| इस से कंप्यूटर की स्पीड और परफोर्मेंस में इजाफा होता है| इसके लिए आप कंट्रोल पेनेल में जाकर या फिर Reevo Unistaller सॉफ्टवेर का प्रयोग कर कंप्यूटर से डिलीट मार सकते हैं| Reevo Unistaller डायरेक्ट डाउनलोड करने के लिए http://www.revouninstaller.com/start_freeware_download.html पर जाएँ|

(4) वक़्त के साथ-साथ कंप्यूटर पुराना होता जाता है जबकि लेटेस्ट सॉफ्टवेर जयादा से जयादा मेमोरी की डिमांड करने लगे हैं| फिलहाल 1 GB Ram औसत अथवा 2GB Ram पर्याप्त होती है| जैसी ज़रूरत हो वैसा ही कंप्यूटर सिस्टम होना चाहिए| इसके लिए आप मेरा पिछला पोस्ट नया कंप्यूटर लेते वक़्त 10 ध्यान रखने योग्य बातें देखें|

(5) यदि कंप्यूटर में वाइरस आ जाये तो फिर कंप्यूटर फिर तो कंप्यूटर की बैंड बज ही जाती है| बेहतर यही है की कंप्यूटर में वाईरस लगने ही ना दिया जाए| इसके लिए आप कोई भी अच्छा सा एंटी वाईरस अपने सिस्टम में इंस्टाल कर के रखें| "अपने सिस्टम को वाईरस से कैसे बचाए?" जल्द ही इस टोपिक पर लिखूंगा|

(6) कंप्यूटर में प्रतिदिन हजारों फाइल बनती व नष्ट होती हैं, वैसे तो कंप्यूटर खुद व खुद बेकार की फाइल को डिलीट कर देता है मगर कुछ रह जाती हैं जो कंप्यूटर स्लो कर स्लो कर देती हैं| अत: कचरा फाईलो को साफ़ सफाई कर के कंप्यूटर को फास्ट किया जा सकता है| इसके लिए कंप्यूटर की डिस्क क्लीन-अप यूटीलिटी एक्सेसरी से प्रयोग कर हर महीने साफ़ सफाई करते रहें|

(7) कंप्यूटर में अपने आप या फिर कोई सॉफ्टवेर लोड करने के बाद सिस्टम चेक पॉइंट जिसे सिस्टम रीस्टोर के नाम से भी जाना जाता है अपने आप बनते जाते हैं| सिस्टम रीस्टोर पॉइंट सिस्टम के ख़राब होने की दशा में बहुत कारगर हते हैं| मगर बेकार और पुराने रीस्टोर पॉइंट साफ़ करना ठीक है| इसके लिए आप इसके लिए कंप्यूटर की डिस्क क्लीन-अप यूटीलिटी में देखें|
याद रखें एक रीस्टोर पॉइंट ज़रूरी है जो ज़रूरत पड़ने पर वाकई में काम आए|



(8) मैंने देखा है की कुछ लोग कंप्यूटर में गलती से 1 से ज्यादा एंटी वाईरस लोड कर लिया करते हैं| एंटी वाईरस एक ही है जो ठीक से काम करे| 1 से अधिक एंटी वाईरस कंप्यूटर में लोड बढ़ाते हैं और सिस्टम क्रेश भी कर सकते हैं|

(9 ) कंप्यूटर में फाइल फोल्डर जल्दी जल्दी बनाने और डिलीट करने की वजह से हार्ड डिस्क पर व्हाईट स्पेस बन जाता है जिसे डिस्क फ्राग्मेंट भी कहते हैं| 3 -6 माह के बाद डिस्क डी फ्राग्मेंट करना ज़रूरी होता है| इसके लिए माय कंप्यूटर पर राईट क्लिक कर मेनेज या फिर कण्ट्रोल पेनेल के एडमिनिस्ट्रेटिव टूल्स में से कंप्यूटर मेनेज़मेंट को सेलेक्ट कर डिस्क डी फ्राग्मेंट आप्शन को चुनें| डिस्क डी फ्राग्मेंट करने से कंप्यूटर हार्ड डिस्क का स्पेस अर्रेंज़ आर्डर में रहेगा और स्पीड भी बढेगी|

(10 ) कुछ प्रोग्राम्स कंप्यूटर स्टार्ट करने के साथ ही सेल्फ स्टार्ट हो जाते हैं और कंप्यूटर स्टार्ट होने में ही काफी देर लेता है, लिहाज़ा सिर्फ ऐसे ही प्रोग्राम्स को लोड किया जाना चाहिए जिनकी वाकई ज़रूरत हो| ALT +CTRL +DELETE तीनो कीज़ एक साथ दवाने पर टास्क मैनेज़र आए तो उसमे देखें की कितने प्रोग्राम्स आपके द्वारा चलाये गए और कितने कंप्यूटर के साथ स्वत: ही स्टार्ट हो गए हैं|

ऊपर लिखी बातों के बाद भी आपके कंप्यूटर की स्पीड नहीं बड़ी है तो आप मुझे यहाँ कमेन्ट दे सकते हैं| आपकी समस्या का निवारण किया जायेगा|

धन्यवाद!!

-
इंजिनियर मैक मीर
(निदेशक)
आई टी मैक डोट कोम
प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान
आगरा|


Wednesday, October 19, 2011

कॉल स्पूफिंग या फेक कॉलिंग


सोचिये यदि आपको आपके पापा के फोन नंबर से कॉल आए और आप रिसीव कर बात करें| जबकि आपके पापा ने फोन कॉल की ही ना हो!! या फिर ऐसे किसी नंबर से आपके पास कॉल आए जो रेडाईल करने पर नॉट एक्सिस्ट हो!! जैसे की 9999999999 या फिर 9800000000 या फिर किसी भी ऐसे नंबर से जो है ही नहीं|

http://www.spyzone.com/skins/ClickCartPro/media/spoof-call.jpg

आप सोच पड़ जायेंगे की आखिर ऐसा कैसे हो गया? जी हाँ यह 2011 तकनीकी का ज़माना है और कुछ भी संभव है| आप किसी के भी फोन नंबर से बिना उसके फोन या सिम लिए बिना ही अपने फोन से कॉल कर सकते हैं| कंप्यूटर साईन्स में इस तकनीक को कॉल स्पूफिंग या फेक कॉलिंग कहा जाता है| इसकी शुरुआत 2003 से ही हो चुकी है और लगातार डेवलपमेंट प्रोग्रेस है|

http://www.plsbuy.com/VoIP_Terminals/Voip_Phone_Works.gif

आजकल तमाम वेबसाइट कॉल स्पूफिंग सर्विस प्रोवाइड करा रही हैं| मामूली सा कंप्यूटर ज्ञान रखने वाला भी अब तो कॉल स्पूफिंग कर फेक कॉल कर सकता है| जयादातर वेबसाइट लोगिन कर अकाउंट बनाने की सुविधा और फिर कॉल स्पूफिंग फैसिलिटी एक्टिवेट करने के लिए रिचार्ज कराती हैं जबकि कुछ बिना अकाउंट बनाये ही स्पूफिंग काल्स करने की सुविधा प्रोवाइड करा रही हैं|

इसी तरह की एक वेबसाइट है www.crazycall.net



इस वेबसाइट में 91 काउंट्री कोड सेलेक्ट करने के बाद जो नंबर आपको कॉलर आई डी में रखना है (या जिस के नंबर से कॉल करना है), फिर वो नंबर जिस पर आपको कॉल करना है| अंत में आवाज़ की पिच मोटी, पतली या नोर्मल सेलेक्ट कर GET ME A CODE पर क्लिक करना होता है| क्लिक करते ही राईट साइड मे यह शो करेगा

Your Crazy Call is ready!!!
Dial to the number: 0044-741-812-0145
When asked enter the code: 93xxx

इसके बाद यह नंबर डाइल 00447418120145 करने पर औटोमटिक वोइस कॉलर मशीन आपसे एक कोड पूछेगा| जैसे की यहाँ कोड है 93xxx इसके बाद # दबाकर कन्फर्म किया जाता है| कोड कन्फर्म होने के बाद कॉल लग जाती है|

हालाँकि यह मज़ा मस्ती तक ही सीमित रहे तो ठीक है वरना इसके दुस्परिणाम भी हैं| भारत में अभी भी बहुत से लोग टेक्नोलोजी से कोसो दूर हैं| फ़ोन काल्स या एस एम एस की सत्यता प्रमाणिक नहीं है फिर भी लोग मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं| बहुत से लोग स्पूफिंग के माध्यम से भोले-भाले नागरिको को डराने धमकाने जैसे काल्स किया करते हैं| हमारी इंडिया की पुलिस और साइबर सेल के काम करने का अंदाज़ ही सबको पता है| भारत में इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देनी चाहिए| TRAI 100 SMS Per Day जैसे नए-नए नियम कानून तो ला रही है लेकिन कॉल स्पूफिंग पर रोक लगाने के लिए अब तक कुछ नहीं कर रही है|

crazycall.net पर की गई कॉल इंटरनॅशनल रेट्स चार्ज करती है| प्रति मिस कॉल देने पर ही 15-20 रूपये और कॉल करने पर जयादा लग जाते हैं| यदि आपको कोई स्पूफ कॉल कर के परेशान कर रहा है तो घबराने की ज़रूरत ही नहीं है| करने दो उसको अपना पैसा बर्बाद हा हा हा हा ... आपके बाप का क्या जा रहा है| थक हार के बेचारा खुद ही बंद कर देगा| अब यदि फिर भी लगातार ऐसे काल्स आयें तो आप इसकी शिकायत अपने कस्टमर केयर पर कर दें| कस्टमर केयर पर शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायत संख्या (Complaint No.) के साथ एक F.I.R. पुलिस में दर्ज करा दें|

स्पूफ कॉलिंग या फेक कॉल इंडिया में एक मंडराता हुआ खतरा है| जयादा से ज्यादा लोगो को जागरूक कर हम इस इस खतरनाक चीज़ को बच्चो की ट्रिक बना डालेंगे| अब कोई नहीं डरेगा सब पड़ेंगे सब बढेंगे|

धन्यवाद!!

-
इंजिनियर मैक मीर
(निदेशक)
आई टी मैक डोट कोम
प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान
आगरा|


http://a4.mzstatic.com/us/r1000/018/Purple/ab/03/8d/mzl.mjvhblbo.jpg

Mobile Number Portability

Hi Friends, I am mak meer. Today i am sharing my MNP story with you. When i heared that in india launched mobile no. portability i was so happy coz i was using CDMA Tata no. and i want to convert this no. into GSM, but i was waiting it from long time. Tata was providing me good network facility but i was not satisfied from handsets. Everybody knows that if you are using CDMA sim you can't use cheap and best GSM mobile. So i heared and applied.The prodedure is Write an sms to 1900 as PORT space Your 10 no.s mobile no.
Example
PORT 9219790xxx
and send to 1900
http://www.91mobiles.com/articles/wp-content/uploads/2010/11/Mobile-Number-Portability-India.jpg
After that you will get a 6 digits port no. as reply. Then i went to Aircel office and filled a MNP form and submitted my one photo and id proof. Aircel Told me your no. will activate after seven days. They gave me a blank sim and said use this after seven days.
Owwww wooowo now i am using my 9219790xxx no. as Aircel's no. No problem in it. Thanks MNP
(Feb 2011 posted on www.funpinch.com)
Now today i am not satisfy with Aircel coz Aircel failed to provides me 3G Services at Agra. I made calls many times to its's customer care, went to Aircel office but result zero. Nothing happns.
Finally i decides to leave Aircel and again do MNP. The rule of MNP is you must stay 90 days after one MNP. I am switching in Tata Docomo and new sim will start on 27 th Oct 2011.
TRAI given the power of customers. Thanx Trai.
http://extremetrix.com/blog/wp-content/uploads/2011/01/mobile-number-portability-300x300.jpg